RCEP: RCEP में शामिल न होने से भारत को फ़ायदा या नुक़सान?

RCEP: RCEP में शामिल न होने से भारत को फ़ायदा या नुक़सान?
RCEP: RCEP में शामिल न होने से भारत को फ़ायदा या नुक़सान?

RCEP: RCEP में शामिल न होने से भारत को फ़ायदा या नुक़सान?

Regional Comprehensive Economic Partnership भारत ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है । चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने दुनिया के इस सबसे बड़े इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं । जानते है RCEP समझौता है क्या और ये इतना जरूरी क्यों कहा जा रहा है।
RCEP पर 10 देशों के दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के समापन के बाद रविवार को वर्चुअल तरीके से हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता करीब आठ साल तक चली बातचीत के बाद पूरा हुआ।  RCEP एक व्यापार समझौता है, जो इसके सदस्य देशों के लिए एक-दूसरे के साथ व्यापार करने को बेहद आसान बनाता है । इसके सदस्य देशों को इंपोर्ट-एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स या तो भरना ही नहीं पड़ेगा या फिर बहुत कम देना पड़ेगा। इस समझौते के तहत भविष्य में सदस्य देशों के बीच व्यापार से जुड़े शुल्क घट जाएंगे ।

भारत इस समझौते में शामिल नहीं हुआ इसके पीछे की वजहें हैं ।  इस समझौते से भारत के मेक इन इंडिया, आत्म निर्भर भारत जैसे मिशन को झटका लग सकता है और चीन को भी तवज्जो देनी पड़ सकती है। इसके ऐसे समझिए-

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1. जब व्यापार शुल्क खत्म हो जाएंगे तो देश में इंपोर्ट से बढ़ने लगेगा। जिससे लोकल मैन्यूफैक्चरर्स, कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है ।
2. साल 2022 में ये लागू होगा, लेकिन कस्टम ड्यूटी का आधार 2014 होगा, जिससे भारत का मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग को झटका लग सकता है।
3. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर कोई देश RCEP के अलावा किसी दूसरे देश को अपने यहां निवेश करने पर अलग से कुछ फायदा देता है तो वही फायदा RCEP देशों को भी देना पड़ सकता है ।
4. RCEP में चीन भी शामिल है, यानि भारत को मजबूरी में चीन को भी वो सभी लाभ देने पड़ते, जो कि भारत के लिए अब मुश्किल है।
5. किसान और व्यापारी संगठन इसका यह कहते हुए विरोध कर रहे थे कि अगर भारत इसमें शामिल हुआ तो पहले से परेशान किसान और छोटे व्यापारी तबाह हो जाएंगे।

चीन ने कहा, भारत ने की गलती
RCEP में शामिल नहीं होने पर चीन ने अपनी खीज निकाली है। चीन के अखबारों ने लिखा है कि भारत ने रणनीतिक तौर पर एक भारी गलती की है। इसके लिए चीन की मीडिया ने strategic blunder जैसे शब्द का इस्तेमाल किया है और कहा है कि भारत आर्थिक रिकवरी करने से गलत हो जाएगा ।

भारत ने दिया जवाब
विदेशी मंत्री एस जयशंकर ( S.Jayshankar ) ने भारत के इस कदम का सही बताया और कहा कि जरूरी नहीं कि सभी करार देश के लिए अच्छे ही हों । RCEP में हम वैश्विक प्रतिबद्धता में बंध जाते, इसके कई शर्तें हमारे पक्ष में नहीं हैं। जो इस डील की तारीफ कर रहे हैं वो पूरी पिक्चर नहीं दिखा रहे हैं ।

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